राफेल डील पर मोदी सरकार कर रही है ‘आना-कानी’ ,सुप्रीम कोर्ट ने कहा…

इस देश की सबसे विवादित डील अब तक राफेल विमान सौदे को माना जा रहा है। यह सौदा भारत सरकार ने फ्रांस के साथ किया था। जिसे लेकर वह तब से ही विपक्षी दलों के निशाने पर बने हुए हैं। दरअसल कांग्रेस ने हमेशा राफेल विमान डील को मोदी और अंबानी की मिलीभगत बताया है।

1- राफेल डील मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय जवानों के खून का दलाल तक करार दे दिया था। आपको बता दें कि राफेल विमान डील मामले में फ्रांस की पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा किए गए खुलासे के बाद देश में इस डील को लेकर चर्चा अब सियासी गलियारों के साथ साथ आम जनता के बीच भी होने लगी है।

2- कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया ये आदेश

गौरतलब है कि इस दिल में मोदी सरकार ने सीधे तौर पर उनके करीबी दोस्त अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया है आपको बता दें कि यह डिफ्रांस सरकार द्वारा अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को दी गई है लेकिन इस मामले में पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने यह बताया है कि उन्हें मोदी सरकार द्वारा और कोई विकल्प नहीं दिया गया था इसलिए वह उन्हें ही चुनने के लिए मजबूर थे।

3- केंद्र सरकार कर रही जानकारी देने से आनाकानी

आपको बता दें कि कल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं द्वारा डाली गई याचिका पर सुनवाई हुई है और कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह आदेश दिया है कि वह 29 अक्टूबर से पहले राफेल डील मामले की जानकारी कोर्ट के समक्ष पेश करें। लेकिन सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह जनहित याचिका नहीं बल्कि राजनीतिक हित की याचिका है।

4- कहा- चुनावी दौर चल रहा है

इसके साथ ही अटॉर्नी जनरल नहीं है। अभी कहा है कि इस वक्त देश में चुनावों का दौर चल रहा है और इस मामले में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है और इस चुनावी माहौल में अगर इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किया जाता है तो वह सीधे प्रधानमंत्री को जाएगा। उन्होंने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई की जरूरत नहीं।

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