मस्जिद और नमाज़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुसलमानो में हड़कम्प

बाबरी मस्जिद को लेकर इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. माना जा रहा है कि इस मामले को लेकर जल्द ही कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है. लेकिन टाइटल सूट के फैसले से पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला किया है, जिससे इस मामले के मुस्लिम पक्ष को तगड़ा झटका लगा है.

1. सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

दरअसल बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट इस पर विचार कर रहा था कि क्या मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का हिस्सा नहीं है. मुस्लिम पक्ष की मांग थी कि टाइटल सूट की तरह इस मुड़े को भी फिर से विचार के लिए पांच सदस्य संविधान पीठ के पास भेजा जाये. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों की यह बात नहीं मानी है और इस मुद्दे को पांच सदस्य संविधान पीठ के पास भेजने से साफ इनकार कर दिया है.

2. मुस्लिम पक्ष को लगा झटका

बता दे कि कोर्ट ने 1994 के अपने फैसले में मस्जिद में नमाज़ पढने को इस्लाम का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था. लेकिन अब मुस्लिम पक्ष की ओर से इस फैसले पर कोर्ट से फिर विचार करने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया है.

3. मस्जिद में नमाज़ पढ़ना इस्लाम का हिस्सा नहीं

ऐसे में अब इस मामले में टाइटल सूट पर फैसला आना बाकी है. वहीँ कोर्ट के इस फैसले पर मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है. कुछ मुसलमानों ने कोर्ट के इस फैसले पर नाराज़गी जताई है तो कुछ ने इसे लेकर दूसरा नजरिया लगाया है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा मज्सिद में नमाज़ पढने को इस्लाम का हिस्सा मानने से इनकार करने को लेकर मुस्लिम समाज का कहना है कि वह कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं. उनका कहना है कि कोर्ट ने अपने इस फैसले से साबित कर दिया है कि अब इस मुद्दों को आस्था से जोड़कर नहीं देखा जायेगा. उनका कहना है कि अब कोर्ट को इसे महज़ ज़मीन विवाद का केस समझकर सुनाई करनी चाहिए.

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