शिवपाल यादव के बाद इस दिग्गज ने बनाई अपनी पार्टी, बड़ी पार्टियों में हंगामा

लोकसभा 2019 का चुनाव अगले कुछ ही महीनों में होने वाले है एक तरफ सभी राजनीतिक पार्टियां खुद को एक दूसरे से बेहतर दिखाने में लगी हुई है। चुनाव से पहले अक्सर ऐसी खबरे आती रहती है कि किसी मतभेद या किसी भी वजह के कारण नेता ने अपनी पार्टी छोड़ दी। यह अटकलें तेज हो जाती है कि वह किसी और पार्टी का दामन थाम लेंगे या किसी और पार्टी का गठन करेंगे। जहां एक तरफ सपा से अलग होने के बाद शिवपाल सिंह यादव द्वारा नई राजनीतिक पार्टी गठन करने की बात सुर्खियों में थी। वहीं वहीं सुनने में आ रहा है कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया अपनी पार्टी का नाम एलान करने वाले हैं।

1- यूपी की राजनीति में नया मोड़

यूपी के कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने जा रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि 30 नवंबर को अपने राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर वह लखनऊ में सत्य प्रदर्शन करेंगे और संभावना यही है कि उसी दिन हुआ अपनी खुद की पार्टी का नाम ऐलान करेंगे।

2- बाहुबली नेता राजा भैया ने किया नयी पार्टी का गठन

राजा भैया के बारे में दिलचस्प बात तो यह है कि सन 1993 में वह निर्दलीय विधायक बने थे उनका वर्चस्व और देश की जनता के बीच उनकी बाहुबली छवि को देखते हुए 1993 से लेकर आज तक हमेशा उनके बारे में किसी ना किसी पार्टी में शामिल होने की खबरें चर्चा का विषय बनी रहती है ।लेकिन उन्होंने किसी भी पार्टी को ज्वाइन नहीं किया ।खास बात यह है कि ,निर्दलीय होने के बावजूद भी उन्हें प्रदेश की कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, रामप्रकाश गुप्ता, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव कि सरकार में वह कैबिनेट मंत्री रहे।

3- दिल्ली में जमाया डेरा

विशेष सूत्रों से पता चला है कि राजा भैया ने अपनी नई पार्टी के गठन की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है और इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग को नई पार्टी के गठन का आवेदन भी कर दिया है।सूत्रों से पता चला की 9 अक्टूबर को राजा भैया की तरफ से अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल ने आवेदन किया है।पार्टी बनाने को लेकर अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल जी और राजा भैया के मास्टर बैन केएन ओझा ने दिल्ली में डेरा जमाया हुआ है। 10 अक्टूबर को राजा भैया अपना शपथपत्र जमा कर सकते हैं।

4- विपक्षियों में तेज़ हुई सियासी हलचलें

राजू भैया के समर्थकों ने नई पार्टी के गठन के लिए एक कैंपेन चलाया हुआ था। जिसमें नई पार्टी का गठन और साथ ही साथ सपा और भाजपा के साथ हाथ मिलाने की बात कही गई थी लेकिन देश के 20 राज्यों से लगभग 20 लाख लोगों की तादाद ने इस पर अपना मत जाहिर किया। विपक्षियों में राजा भैया की पार्टी को लेकर कहीं ना कहीं एक डर सा है क्योंकि एक विशाल जनसमूह उन्हें खासा पसंद करता है। यही कारण है कि सपा और और का भाजपा दोनों में काफी चिंताजनक माहौल देखने को मिल रहा है।

Facebook Comments