अगर आपका एकाउंट SBI में है तो ज़रूर पढ़े, 1 दिसम्बर से बंद हो जाएगी यह सु…

मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद देश की बैंकिग सिस्टम पर बेहद बुरा असर पड़ है. नोटबंदी के बाद चरमराई बैंकिग व्यवस्था अब भी पटरी पर नहीं आ पाई है. फिलहाल बैंकिग व्यवस्था में रोज़ नए नए बदलाव किये जा रहे हैं और नियम में आ रहे बदलाव का सिलसिला अब भी जारी है.

1- चरमराई बैंकिंग व्यवस्था

नोटबंदी के बाद से बैंकिग व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है. ओस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि नोटबंदी का असर कमोबेश अब भी बरकरार है. हालाँकि इसे एक बार फिर से पटरी पर लाने के लिए अधिकार कोशिश कर रहे हैं लेकिन सरकार की तरफ से आ रही रोज़ नए नए बदलाव की वजह से फ़िलहाल इस ठीक नहीं कर पाया गया है.

2- फिर आये नए नियम

दरअसल नोटबंदी लागू होने से पहले सरकार ने दावा किया था कि इसका मकसद काला धन का खात्मा करना है. लेकिन जब यह मकसद पूरा नहीं हो पाया तो सरकार ने इसके मकसद को लेकर तरह तरह के बयान देने शुरू कर दिए और कहा जाने लगा की नोटबंदी का मकसद कैश के इस्तेमाल को कम करना है ताकि लोग ऑनलाइन या प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल करने लगें.

3- रजिस्टर कराना होगा नंबर

बहरहाल, ज़ाहिर सी बात है कि नोटबंदी के दौरान पैसों की किल्लत की वजह से लोगों को पास महज़ एक ही रास्ता था. ऑनलाइन का. इसके बाद लोगों ने नेट बैंकिंग इस्तेमाल करना शुरू किया. लेकिन बीते कुछ समय से नेट बैंकिंग के मामले में घोखाधड़ी के कई मामने सामने आये. ऐसे में अब इसे रोकने के लिए स्टेट बैन ने बड़ा कदम उठाया है.दरअसल बैंक ने कहा है कि नेट बैंकिंग के इस्तेमाल के लिए आपको अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर एक दिसंबर से पहले कराना होगा. बैंक ने कहाः है कि बिना नंबर रजिस्ट कराए नेट बैंकिंग नहीं इस्तेमाल हो पाएगी. इसके अलावा 31 अक्टूबर के बाद एटीएम से बस बीस हज़ार ही निकल पाएंगे.

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