कनाडा पहला ऐसा देश बना, जिसने मुसलमानो के समर्थन में उठाया बड़ा कदम

रोहिंग्या मुसलमानों को आज दुनिया की सबसे मजलूम समुदाय के तौर पर देखा जा रहा है. आये दिन रोहिंग्या मुसलमानों से जुडी दिल दहला देने वाली रिपोर्ट आ रही हैं. इन रिपोर्ट को पढ़कर यह दिल में ख़याल आता है कि योहिंग्य मुसलमानों पर ज़ुल्म करने वाले इंसान नहीं हो सकते हैं.

1- दुनिया का सबसे मजलूम समुदाय

देखा जाए तो यह बात सही भी है कोई इंसान महज़ मज़हब के नाम पर किसी दूसरे इन्सार के साथ हैवानियत कैसे कर सकता है. बिना वजह किसी दुसरे की जान लेना तो जानवरों का काम होता है. बहरहाल, फिलहाल रोहिंग्या मुसलमानों ने बर्मा में अपना सब कुछ गँवा दिया है और अपनों को भी.

2- आंग सान सू ची संदिग्ध भूमिका

बचे कुचे और लुटे पिटे रोहिंग्या मुसलमान फिलहाल अपनी जान बचाने के लिए बांग्लादेश में किसी तरह ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं लेकिन यहाँ भी इन कैम्पों में उनके हालात ठीक नहीं है. कमोबेश हर चीज़ का अभाव है. इसके अलावा कुछ रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत में भी शरण ले रही है.

3- कनाडा ने लिया बड़ा फैसला

हालाँकि रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर भारत सरकार का रुख कुछ सही नहीं है. ऐसे तमाम मौकों पर भाजपा और सरकार में शामिल लोगों ने रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर निकालने की बात कह चुके हैं लेकिन इस बीच अब कनाडा ने बड़ा कदम उठाया है.कनाडा सरकार म्यांमार की नेता आंग सान सू ची को दी गई मानद नागरिकता को वापस लेने जा रही है. इसके लिए कनाडा सरकार ने प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है. इस बात की जानकारी कनाडा के विदेश मंत्री क्रिस्टिया फ्रीलैंड के प्रवक्ता एडम ऑस्टिन ने दी है.बात दें कि म्यांमार की नेता आंग सान सू ची को कनाडा सरकार की तरफ से मानद नागरिकता की उपाधि 2007 में दी गई थी. लेकिन अब जब रोहिंग्या मुसलमानों पर हुए अत्याचार पर उन्होंने चुप्पी साधी रखी तो इसकी वजह से कनाडा सरकार ने कदम उठाने का फैसला किया है.

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