चुनाव से पहले हाथी का पुराना साथी लौटा, बसपा समर्थको में खुशी की लहर

देश भर में लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ता जा रहा है. फिलहाल इसके लिए सभी पार्टियों ने रणनीति बना ली है या बना रही है और अब उस रणनीति पर चलने का वक़्त आ गया है. हालाँकि लोकसभा चुनाव से पहले कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने है. इन राज्यों में राजस्थान भी शामिल है. दरअसल राजस्थान में भाजपा का शासन चल रहा है.

1- राजस्थान में चुनाव की सुगबुगाहट

लेकिन इस बार वहां का माहौल बदला बदला सा दिख रहा है. वहीँ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस बार एक तरफ जहाँ देश भर में मोदी का मैजिक नहीं दिख रहा है वहीँ राजस्थान में सीएम वसुंधरा राजे को लेकर काफी जनता नाराज़ दिख रही है और सत्ता परिवर्तन की पूरी उम्मीद लग रही है. ऐसे में अब भाजपा को मोदी के भाषण और अमित शाह की रणनीति का ही भरोसा है.

2- बसपा अकेले लड़ेगी चुनाव

इस बीच अब राजस्थान में मायावती भी अपनी पार्टी बसपा के लिए सियासी ज़मीन तलाश रही है. हालाँकि बड़ी बात यह है कि एक तरफ जहाँ बसपा का जनाधार यूपी में कम होता जा रहा है. ऐसे में अब बसपा राजस्थान में अकेले दम पर चुनाव लड़ रही है. बहरहाल, हाल ही में बसपा चीफ मायावती ने यह साफ़ कर दिया है कि राजस्थान में उनकी पार्टी कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेगी. उम्मीद की जा रही है कि मायावती के इस कदम से भाजपा को फायदा मिलेगा.

3- 55 सीटों पर है जनाधार

इस बीच अब उन्होंने राजस्थान चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए चुनाव की कमान धर्मवीर अशोक के हाथों सौंप दी है. बता दें कि राजस्थान की सियासत में 2008 में बसपा ने मजबूती के साथ दस्तक दी थी. वहीँ राज्य की करीब 55 सीटों पर बसपा का अच्छा खासा का वोट बैंक है. ऐसे में कहा जा रहा है कि बसपा सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है.

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