भाजपा के 44 साल पुराने दिग्गज ने की बगावत, पलट सकता है खेल

लोकसभा 2019 का चुनाव के लिए कुछ ही महीनों में होने को है ।इससे पहले कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। जिसकी तैयारी में चुनावी हलचल तेज हो गई हैं ।चुनावी गलियारों में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ साथ अपने आप को बेहतर दिखाने की प्रक्रिया जोरों पर चल रही है। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिससे तैयारियां काफी तेज है। भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आने के लिए फिर से व्याकुल है और हर तरह की राजनीति काथकंडे अपना रही हैं।

1- मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी चिंतित

अगर भाजपा के लिए कैसे वरदान वाली सीट का नाम लिया जाए तो वह है मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की गोविंदापुर सीट ऐसी सीट है जिस पर भाजपा पिछले 40 साल से राज्य कर रही है। यहां के 50 फीसदी वोटर्स पिछड़ी जाति से है। ये बीजेपी के परंपरागत वोटर हैं। इस सीट पर पिछले 44 साल से एक ही उम्मीदवार जीतते आ रहा है।

2- ये है बीजेपी की परंपरागत सीट

गोविंदा पुर भाजपा की सीट है जिस पर कोई भी खड़ा हो जाए उसे भाजपा के द्वारा हार का सामना करना पड़ता है। आज भी यहां सड़क, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर ही चुनाव लड़े जाते हैं।वहां पर बाकी पार्टिओं को भाजपा के द्वारा बड़े से बड़े संख्या में वोट के अंतर के साथ हार का मुह देखना पड़ता है ।आपको बता दे कि 2013 के चुनाव में बाबूलाल गौर ने कांग्रेस के गोविंद गोयल को 70 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इससे पहले 2008 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की उम्मीदवार विभा पटेल को 33 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।

3- परिवारबाद से नाख़ुश जनता

2018 के विधानसभा चुनाव में सुनने में आ रहा है कि ऐतिहासिक सीट गोविंदा पुर पर इस बार बाबूलाल चुनाव नहीं लड़ सकेंगे क्योंकि उनकी उम्र काफी ज्यादा हो गई है और इसके लिए उनकी बहू कृष्णा को उस सीट पर टिकट दिया जाएगा। हालांकि यह सम्भावना काफी ज्यादा हद तक सही लग रही है लेकिन वहां की जमीनी जनता इस बात से बिल्कुल खुश नहीं है और उन्हें लग रहा है ,कि यह वंशवाद और परिवारवाद को बनाए रखने के लिए भाजपा से रहने लगा रही है। गौरतलब है कि नाखुश जनता अपनी नाराजगी का प्रदर्शन करेगी इसलिए कुछ दिन पहले वहां की जनता ने एक सुंदरकांड का पाठ कहा था। जिससे कि सरकार को सद्बुद्धि आए और वह परिवारवाद को कायम ना करो। दिलचस्प बात यह है कि सुंदरकांड का नामकरण भी ऐसा ही दिया गया था कि ,’परिवारवाद हटाओऔर गोविंदा पुर की सीट बचाओ’।

4- कांग्रेस ने जमकर निशाना साधा

जहां एक तरफ भाजपा कांग्रेस को हमेशा परिवारवाद का उदाहरण देती रहती है और समय-समय पर विरोध करती रहती है ।वहीं गोविंदा पुर की सीट पर किस प्रकार से टिकट दिए जाने की आशंका पर कांग्रेस को एक बार फिर से भाजपा पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। इसी क्रम में अनुराग ठाकुर पंकज सिंह आदि लोगों पर निशाना साधा गया।

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